आयुध डिपो के
प्रतिबंधित दायरे में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है हाई कोर्ट के जज राजेश
बिंदल की पीठ ने सन 1903 के डिफेन्स एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के
बाद रक्षा मंत्रालय, हरियाणा सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय, नगर निगम गुडगाँव आदि
को नोटिस ज़ारी किया है। दरअसल गुडगाँव गाँव
निवासी विक्रम कटारिया ने अपने वकील
प्रदीप रापडिया के माध्यम से हाई कोर्ट में गुहार लगाई कि सौ साल पुराने कानून का
दुरूपयोग अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर रहने वाले लोगों को उजाड़ने के लिए किया जा रहा है,
जबकि मारुती उद्योग, पास्को ऑटोमोबाइल आदि नामी कम्पनियाँ, जो की आयुध डिपो के
प्रतिबंधित दायरे में मौजूद हैं, के खिलाफ सरकार कोई कार्यवाही नहीं कर रही है।
याचिकर्ता के वकील
ने बहस के दौरान कहा कि एक तरफ तो सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा किये हुए झुगीयों में रहने
वाले लोगों को घर देकर पुनर्वास करने की योजना बना रही है, दूसरी तरफ सरकार अपनी
पुस्तैनी ज़मीन पर आयुध डिपो के दायरे में अनगिनित वर्षों से से रह रहे किसानों को बिना
पुनर्वासित किए बगैर उजाड़ने पर उतारू है । लोगों को बिना पुनर्वासित किये उनके मानवाधिकार का उलंघन है। बहस के दौरान ये भी
कहा गया कि सन 1903 से लेकर आज तक एक रुपये का भी मुआवजा किसानों को नहीं दिया गया
है जबकि डिफेन्स एक्ट के अनुसार छे महीने के अन्दर किसानों को मुआवजा मिल जाना
चाहिए
।
मामले की सुनवाई के
बाद हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय, हरियाणा सरकार व ग्रामीण विकास मंत्रालय आदि को
नोटिस ज़ारी करते हुए जवाब दायर करने के लिए व स्टे पर बहस के लिए 19 सितम्बर
निर्धारित की है।

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